Thursday, February 25, 2016

लहरे स्मृतियों की
वक्त से, बटोर के लाती
मोती सुनहरी यादों के
और ख्वाहिशों के किनारों पर
नजर आते हैं जब लम्हे 


कई सुनहरे बिखरे हुए
मै बस देख पाती हूँ
रेंत पर बिखरे अल्फाज़
जो बह गये है दूर कहीं
स्मृतियों की लहरों के साथ
तुम चुग लेना सुनेहरे मोती
मै साथ ले आऊंगी वही
सीली सी रेत अपने साथ......

............शब्द सरिता-सविता

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